जिनका हिलो और गोबर से कोई नाता नहीं, उन्होंने मेरी आलोचना की: आशिका

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) की ओर से धादिङ-1 से उम्मीदवार रहीं आशिका तामांग ने कहा है कि जिन लोगों का हिलो (कीचड़) और गोबर से कोई लेना-देना नहीं है, उन्होंने उनकी आलोचना की है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है- ‘मैं धादिङ के मलेखु में जन्मी एक सामान्य, बल्कि अत्यंत निम्न स्तर के परिवार से संघर्ष करती आई किसान की बेटी हूँ। मेरी बचपन की यादें महलों की दीवारों पर नहीं, बल्कि मलेखु की उन चढ़ाइयों-उतारों और दूसरों के खेतों की मेड़ों पर उकेरी गई हैं। आज मेरी एक स्वाभाविक गतिविधि को लेकर विपक्षी लोग मसाला बनाकर व्यंग्य कर रहे हैं, तो मुझे उन आलोचकों से कोई शिकायत नहीं है। क्योंकि जिसने कभी हिलो और गोबर से नाता नहीं जोड़ा, वह इसका मर्म कभी नहीं समझ सकता।’

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उन्होंने लिखा है- ‘मेरे पूजनीय पिताजी ने अपना सारा जीवन दूसरों के घर में रहकर और दूसरों के खेतों में पसीना बहाकर बिताया। अपना घर तक न होने की उस कठिन परिस्थिति में पिताजी ने दूसरों के घर में हलवाहा बनकर हमें पाला। हमारे परिवार की ज़रूरतें उन्हीं गौशालाओं की बकरियों और बाड़ों की मुर्गियों से पूरी होती थीं। नेपाल के तमाम किसानों के लिए वे पशु-पक्षी केवल जानवर नहीं हैं, बल्कि अपनी संतान जैसे हैं। सुबह उठते ही मुर्गे की बांग से शुरू होने वाली हमारी दिनचर्या बकरियों के बच्चों की ‘म्यां-म्यां’ की आवाज़ में ही रम जाती थी।’

उन्होंने कहा, ‘जब घर की समस्या निपटाने के लिए अपने गोद में खिलाए गए मेमने को बेचना पड़ता था, तब पिताजी और मेरा मन कितना रोता था। अपनी संतान जैसा प्यार करके पाले गए जीव को पैसे से बदलना पड़ता था, वह दर्द धादिङ का ही नहीं, बल्कि संपूर्ण नेपाली किसान की आँखों में आज भी झलकता है।’

तामांग आगे लिखती हैं- ‘विपक्षी साथियों से मेरा एक ही अनुरोध है कि मेरे विरुद्ध भ्रम फैलाने और मेरे धरातल का मज़ाक उड़ाने के बजाय अपने एजेंडे के साथ जनता के घर-घर जाएं। मेरा विरोध करने से पहले, अतीत में आपने जो भ्रष्टाचार किया और जनता पर जो पाप थोपा है, उसकी माफ़ी मांगें। आपने हमेशा लोगों को केवल वोट का साधन बनाया, लेकिन अब सचेत जनता आपके भ्रम को समझ चुकी है। मुझे मेरे धरातल और मेरे किसान भाइयों-बहनों की कमी को भूलने की इजाज़त नहीं है।’

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